कई बार जब डॉक्टर “इम्यूनोथेरेपी” शब्द इस्तेमाल करते हैं, तो मरीज और उनके परिवार के चेहरे पर एक ही सवाल दिखता है—
“ये आखिर होता क्या है?”
शुरुआत में ये शब्द थोड़ा भारी लग सकता है। लेकिन जब इसे सरल, मानवीय भाषा में समझा जाए, तो पता चलता है कि ये इलाज शरीर की अपनी लड़ने की क्षमता को मजबूत करने का तरीका है — जैसे किसी सैनिक को बेहतर हथियार दे दिए जाएँ।
इम्यूनोथेरेपी क्या है?
हम सबके शरीर में एक इम्यून सिस्टम होता है — यानी बीमारी से लड़ने वाला प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र।
कैंसर कभी-कभी इतना चालाक होता है कि हमारे इम्यून सिस्टम को धोखा दे देता है।
इम्यूनोथेरेपी का काम है इस सिस्टम को फिर से जागरूक करना और कैंसर सेल्स को पहचानकर उनसे लड़ना।
इसे ऐसे समझिए:
जैसे आप अपने मोबाइल में एंटीवायरस डालते हैं ताकि Virus को पहचान सके — उसी तरह इम्यूनोथेरेपी शरीर को कैंसर “वायरस जैसी कोशिकाओं” को पहचानने और खत्म करने में मदद करती है।
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इम्यूनोथेरेपी कैसे दी जाती है?
ज़्यादातर मामलों में ये IV (ड्रिप) के ज़रिए दी जाती है।
कुछ इलाज इंजेक्शन या टैबलेट के रूप में भी होते हैं।
इलाज का टाइम हर मरीज पर निर्भर करता है—
कभी 2–3 हफ्ते में एक बार, कभी महीने में एक बार।
कौन-से कैंसर में इम्यूनोथेरेपी मददगार है?
हर मरीज को ये उपचार नहीं दिया जाता। डॉक्टर कई टेस्ट करके देखते हैं कि यह आपके केस में असरदार होगी या नहीं। आमतौर पर ये इन कैंसर में उपयोगी पाई गई है:
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फेफड़ों का कैंसर
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किडनी का कैंसर
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ब्लड कैंसर के कुछ प्रकार
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स्किन कैंसर
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सिर व गले का कैंसर
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गर्भाशय व सर्वाइकल कैंसर के कुछ मामलों में
लेकिन याद रखें—हर मरीज अलग है, हर शरीर अलग है।
इम्यूनोथेरेपी का फैसला डॉक्टर आपकी रिपोर्ट देखकर ही करते हैं।
इम्यूनोथेरेपी के फायदे
कई लोगों के लिए यह एक आशा की किरण साबित हुई है।
✔ शरीर की नैचुरल पावर बढ़ती है
ये इलाज शरीर के अपने सिस्टम को मजबूत करता है, जिससे इलाज का असर लंबे समय तक रह सकता है।
✔ कई बार कम साइड इफेक्ट
कई मरीज बताते हैं कि उन्हें कीमो की तुलना में कम भारीपन महसूस होता है।
✔ लंबे समय तक फायदा
कुछ मामलों में इसका असर महीनों या सालों तक बना रह सकता है।
क्या इसके साइड इफेक्ट भी होते हैं?
हाँ, लेकिन ये हर मरीज में अलग-अलग होते हैं। सबसे आम साइड इफेक्ट:
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थकान
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बुखार जैसा महसूस होना
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हल्की खांसी
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स्किन पर रैश
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भूख कम होना
कुछ लोगों को इम्यून सिस्टम ओवर-एक्टिव होने के कारण गंभीर लक्षण भी हो सकते हैं, इसलिए
डॉक्टर नियमित मॉनिटरिंग करते हैं।
अगर कुछ भी असामान्य लगे —
जैसे तेज साँस फूलना, हाई फीवर, तेज स्किन रैश —
तो तुरंत डॉक्टर को बताना चाहिए।
क्या टेस्ट ज़रूरी होते हैं?
हाँ। कई बार डॉक्टर PD-L1 जैसी जांच करवाते हैं ताकि पता चले कि आपके शरीर में इम्यूनोथेरेपी का असर होगा या नहीं।
ये बहुत सामान्य प्रक्रिया है, परेशान होने की ज़रूरत नहीं।
इलाज के दौरान मरीज क्या कर सकते हैं?
हल्का खाना:
जैसे दलिया, खिचड़ी, दालें — जिससे शरीर को ऊर्जा मिले लेकिन भारी न लगे।
हल्की-फुल्की वॉक:
दिन में 10–15 मिनट टहलना मदद करता है।
पानी ज्यादा:
इम्यूनोथेरेपी के दौरान हाइड्रेशन बहुत ज़रूरी है।
पर्याप्त नींद:
शरीर जितना आराम करेगा, उतना रिपेयर होगा।
मरीजों का अनुभव क्या कहता है?
कई मरीज कहते हैं कि इम्यूनोथेरेपी शुरू करने के बाद उन्हें धीरे-धीरे ऊर्जा आने लगी,
भूख बेहतर हुई और रोजमर्रा के काम पहले से आसान लगे।
कुछ लोगों को शुरुआत में ज्यादा थकावट महसूस होती है,
लेकिन समय के साथ शरीर एडजस्ट हो जाता है।
हर व्यक्ति का सफर अलग है—
किसी को जल्दी फायदा दिखता है, किसी को धीरे-धीरे।
आखिर में—आशा हमेशा होती है
कैंसर का इलाज सिर्फ दवाइयों से नहीं,
हिम्मत, भरोसा और निरंतर देखभाल से चलता है।
इम्यूनोथेरेपी एक नया अध्याय है जिसने लाखों मरीजों को उम्मीद दी है।
अगर आपके डॉक्टर ने ये इलाज सुझाया है,
तो इसका मतलब है कि उनमें आपके बेहतर होने की पूरी संभावना दिख रही है।
आप अकेले नहीं हैं।
आप मज़बूत हैं।
आप लड़ रहे हैं — और विज्ञान आपके साथ है।

